काल भैरव

मंत्र

काल भैरव

मंत्र

  • आरती संग्रह

भैरव स्तुति

भैरव स्तुति ॐ जै-जै भैरवबाबा स्वामी जै भैरवबाबा। नमो विश्व भूतेश भुजंगी मंजुल कहलावा उमानंद अमरेश विमोचन जनपद सिरनावा। काशी के कृतवाल आपको सकल जगत ध्यावा। स्वान सवारी बटुकनाथ प्रभु पी मद हर्षावा। ॐ।। रवि के दिन जग भोग लगावे मोदक मन भावा। भीषण भीम कृपालु त्रिलोचन खप्पर भर खावा। शेखरचंद्र कृपालु शशि प्रभु मस्तक चमकावा। गल मुण्डन की माला सुशोभित सुन्दर दरसावा। ॐ।। नमो-नमो आनंद कंद प्रभु लट गत मठ झावा। कर्ष तुण्ड शिव कपिल त्रयम्बक यश जग में छावा। जो जन तुमसे लगावत संकट न

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  • आरती संग्रह

श्री कालभैरवाष्टकं

॥ श्री कालभैरवाष्टकं ॥ देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् । नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ १॥ भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् । कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ २॥ शूलटंकपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् । भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥ ३॥ भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्त

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