सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची सर्वागी सुंदर उटि शेंदुराची कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची ।।1।। जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति दर्शनमात्रें मनकामना पुरती ।।धृ।। रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा हिरेजडित मुगुट शोभतो बरा रुणझुणती नूपुरें चरणीं घागरिया जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।। 2।। लंबोदर पितांबर फणिवरबंधना सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना दास रामाचा वाट पाहे सदना संकटी पावावें निर्वाणीं रक्षावें सुरवर वंदना जय देव जय
Read More..जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता।। धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता।।धृ।। शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुखको।। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहरको।। हाथ लिए गुडलड्डू सांई सुरवरको।। महिमा कहे न जाय लागत हूं पदको।। जय ।।1।। अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरी।। बिघनबिनाशन मंगलमूरत अधिकारी।। कोटीसुरजप्रकाश ऐसी छब तेरी।। गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारी।। जय।।2।। भावभगतसे कोई शरणागत आवे।। संतत संपत सबही भरपूर पावे।। ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे।। गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे।। जय ।।3।।
Read More..जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे । त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी । त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी
Read More..लवथवती विक्राळा ब्रह्माण्डी माळा। वीषे कण्ठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळा। लावण्य सुन्दर मस्तकी बाळा। तेथुनिया जळ निर्मळ वाहे झुळझुळा॥ जय देव जय देव जय श्रीशंकरा। आरती ओवाळू तुज कर्पुरगौरा॥ कर्पुर्गौरा भोळा नयनी विशाळा। अर्धांगी पार्वती सुमनांच्या माळा। विभुतीचे उधळण शितिकण्ठ नीळा। ऐसा शंकर शोभे उमावेल्हाळा॥ जय देव जय देव जय श्रीशंकरा। आरती ओवाळू तुज कर्पुरगौरा॥ देवी दैत्यी सागरमन्थन पै केलें। त्यामाजी अवचित हळाहळ जें उठिले। ते त्वां असुरपणे प्राशन केलें। नीलकण्
Read More..आरती करो हरी हर की करो नटवर की भोले शंकर की आरती करो शंकर की आरती करो हरी हर की करो नटवर की भोले शंकर की आरती करो शंकर की सर पर शशि का मुकुट सकारे तारो की पायल झनकारे सर पर शशि का मुकुट सकारे तारो की पायल झनकारे धरती अम्बर डोले तांडव लीला से नटवर की आरती करो शंकर की आरती करो हरी हर की करो नटवर की भोले शंकर की आरती करो शंकर की कनिका हार पहनने वाले शम्बू है जग के रखवाले कनिका हार पहनने वाले शम्बू है जग के रखवाले सकत चारा चार आग जग नाती उंगी पर विष धर
Read More..जेजुरगड पर्वत शिव लिंगाकार मृत्यू लोकी दुसरे कैलास शिखर नाना परीची रचना रचिली अपार जळी स्थळी नांदे स्वामी शंकर ll १ ll जयदेव जयदेव जय शिव मार्तंडा अरी मर्दन मल्लारी तुझी प्रचंडा ll धृ ll मणी मल्ल दैत्य प्रबळ जाहला येवूनी त्याने प्रलय मांडीला न आटोपे कोणा स्मरणे मातला देव गण गंधर्व कापती त्याला ll २ ll जयदेव जयदेव जय शिव मार्तंडा अरी मर्दन मल्लारी तुझी प्रचंडा ll धृ ll चंपाषष्ठी दिवसी अवतार धरिसी मणी मल्ल दैत्यांचा संहार करिसी चरणी पृष्ठी खडगे वर्मी स्थापिस
Read More..हर हर हर महादेव! सत्य, सनातन, सुन्दर, शिव सबके स्वामी। अविकारी अविनाशी, अज अन्तर्यामी॥ हर हर हर महादेव! आदि, अनन्त, अनामय, अकल, कलाधारी। अमल, अरूप, अगोचर, अविचल, अघहारी॥ हर हर हर महादेव! ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर तुम त्रिमूर्तिधारी। कर्ता, भर्ता, धर्ता, तुम ही संहारी॥ हर हर हर महादेव! रक्षक, भक्षक, प्रेरक, प्रिय औढरदानी। साक्षी, परम अकर्ता, कर्ता अभिमानी॥ हर हर हर महादेव! मणिमय-भवन निवासी, अति भोगी रागी। सदा श्मशान
Read More..शीश गंग अर्धग पार्वती, सदा विराजत कैलासी। नंदी भृंगी नृत्य करत हैं, धरत ध्यान सुखरासी॥ शीतल मन्द सुगन्ध पवन, बह बैठे हैं शिव अविनाशी। करत गान-गन्धर्व सप्त स्वर, राग रागिनी मधुरासी॥ यक्ष-रक्ष-भैरव जहँ डोलत, बोलत हैं वनके वासी। कोयल शब्द सुनावत सुन्दर, भ्रमर करत हैं गुंजा-सी॥ कल्पद्रुम अरु पारिजात तरु, लाग रहे हैं लक्षासी। कामधेनु कोटिन जहँ डोलत, करत दुग्ध की वर्षा-सी॥ सूर्यकान्त सम पर्वत शोभित, चन्द्रकान्त सम हिमराशी। नित्य छहों ऋतु रहत सुशोभित, सेवत सदा प्रकृति
Read More..ऊँ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।। ऊँ जय अम्बे गौरी. माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृग मद को। उज्ज्वल से दोउ नैना चन्द्रवदन नीको।। ऊँ जय अम्बे गौरी. कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै।। ऊँ जय अम्बे गौरी. केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दु:खहारी।। ऊँ जय अम्बे गौरी. कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।। ऊँ जय अम्बे गौरी.
Read More..दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी | अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी | वारी वारी जन्ममरणाते वारी | हरी पडलो आता संकट निवारी || १ || जय देवी जय देवी महिषसूरमथिनी | सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी जय देवी जय देवी || धृ || त्रिभुवन भुवनी पाहता तुजऐसी नाही | चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही | साही विवाद करिता पडिले प्रवाही | तें तू भक्तालागी पावसी लवलाही || जय || २ || प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा | क्लेशापासुनि सोडावि तोडी भवपाषा अंबे तुजवाचून कोण पुरविल आशा |
Read More..उत्कट साधुनि शिळा सेतू बांधोनी । लिंगदेह-लंकापुरि विध्वंसूनी ॥ कामक्रोधादिक राक्षस मर्दूनी । देह-अहंभाव रावण निवटोनी ॥ १ ॥ जय एव जय देव निजबोधा रामा । परमार्थे आरती सद्भावें आरती परिपूर्णकामा ॥ध्रु० ॥ प्रथम सीताशुद्धी हनुमंत गेला । लंका दहन करुनी अखया मारिला ॥ मारिला जंबूमाळी बुवनीं त्राहाटीला । आनंदाची गुढी घेउनियां अला ॥ जय० ॥ २ ॥ निजबळें निजशक्ति सोडविली सीता । म्हणुनी येणें झालें आयोध्यें रघुनाथा ॥ आनंदें वोसंडे वैराग्य भरता । आरति घेउनि आली कौसल्या माता
Read More..गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥ x2 कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं। गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी
Read More..ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे | भक्त जनो कें संकट क्षण में दूर करे || ओSम || जो घ्यावे फल पावे दु:ख विनशे मनका | सुख संपती घर आवे कष्ट मिटे तनका || ओSम || मात पिता तुम मेरे शरण गहू किसकी | तुम बिन और न दूजा आस करू किसकी || ओsम || तुम हो पुरण परमात्मा तुम अंतरयामी | पार ब्रम्ह परमेश्वर तुम सबके स्वामी || ओSम || तुम करुणा कें सागर तुम पालन कर्ता | मैं मुरख खल कामी कृपा करि भरता || ओSम || तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपती | स्वामी किस विधी मिलू दयाम
Read More..ओवाळू आरती मदनगोपाळा | श्यामसुंदर गळा वैजयंतीमाळा || धृ || चरणकमल ज्याचे अति सुकुमार | ध्वजवज्रांकृश ब्रीदाचे तोडर ओवाळू || १ || नाभिकमल ज्याचे ब्रम्हयाचे स्थान | हृदयी पदक शोभे श्रीवत्सलांछन | ओवाळू || २ || मुखकमल पाहतां सुखाचिया कोटी | वेधले मानस हारपली दृष्टी | ओवाळू || ३ || जडित मुगुट ज्याचा देदिप्यमान | तेणे तेजे कोंदले अवघे त्रिभुवन | ओवाळू || ४ || एका जनार्दनी देखियले रूप | रूप पाहतां जाहले अवघे तद्रूप | ओवाळू || ५ ||
Read More..आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥ दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥ लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥ पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥ बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन
Read More..सत्राणे उड्डाणे हुंकार वदनी | करि डळमळ भूमंडळ सिंधूजळ गगनी || कडाडिले ब्रम्हांड धाक त्रिभुवनी | सुरवर नर निशाचर त्यां झाल्या पळणी || १ || जय देव जय देव जय श्रीहनुमंता | तुमचेनी प्रसादे न भी कृतांता || धृ || दुमदुमले पाताळ उठिला प्रतिशब्द | थरथरला धरणीधर मानिला खेद | कडकडिले पर्वत उद्दगण उच्छेद | रामी रामदासा शक्तीचा शोध || जय || २ || सत्राणे उड्डाणे हुंकार वदनी | करि डळमळ भूमंडळ सिंधूजळ गगनी || कडाडिले ब्रम्हांड धाक त्रिभुवनी | सुरवर नर निशाचर
Read More..श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्। नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...। कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्। पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...। भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनम्। रघुनन्द आनन्द कन्द कौशल चन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन...। सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभूषणम्। आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम जित खरदूषणम्॥ श्री रामचन्द्
Read More..ऊँ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ ऊँ जय लक्ष्मी माता उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ऊँ जय लक्ष्मी माता दुर्गा रुप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता । जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्घि-सिद्घि धन पाता ॥ ऊँ जय लक्ष्मी माता तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता । कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥ ऊँ जय लक्ष्मी माता जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता । सब सम्भव हो जाता, म
Read More..जयदेवी जयदेवी जय लक्ष्मीमाता | प्रसन्न होऊनिया वर देई आता || धृ || विष्णुप्रिये तुझी सर्वांतरी सत्ता | धन दौलत देई लक्ष्मीव्रत करिता || १ | विश्वव्यापक जननी तुज ऐसी नाही | धावसी आम्हालागी पावसी लवलाही || २ || त्रैलोक्य धारिणी तू भक्ता लाभो सुखशांती | सर्व सर्वही दु:ख सर्व ती पळती || ३ || वैभव ऐश्वर्याचे तसेच द्रव्याचे | देसी दान वरदे सदैव सौख्याचे || ४ || यास्तव अगस्ती बंधू आरती ओवाळी | प्रेमे भक्तासवे लोटांगण घाली ||
Read More..जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी। वससी व्यापकरुपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥ करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता। पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता। कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता। सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥ जय देवी जय देवी...॥ मातुलिंग गदा खेटक रविकिरणीं। झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी। माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी। शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥ जय देवी जय देवी...॥ तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी। सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी। गायत्री निजबीजा निगमागम सारी। प्रगटे
Read More..जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥ जय लक्ष्मी.. रत्न जडि़त सिंहासन अद्भुत छवि राजै। नारद करत निरंजन, घण्टा ध्वनि बाजै ॥ जय लक्ष्मी.. प्रगट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो। बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कञ्चन महल कियो ॥ जय लक्ष्मी.. दुर्बल भील कराल, जिन पर कृपा करी। चन्द्रचूड़ एक राजा तिनकी विपत्ति हरी ॥ जय लक्ष्मी.. वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीनी। सो फल भोग्यो प्रभु जी, फिर-स्तुति कीन्हीं ॥ जय लक्ष्मी.. भा
Read More..आवडी गंगाजळे देवा न्हाणीले | भक्तीचे भूषण प्रेमासुगंध अर्पिले | अहं हा धूप जाळू श्रीहरीपुढे | जंव जंव धूप जळे | तंव तंव देवा आवडे | रमावल्लमदासे अहं धूप जाळिला | एकारतीचा मग प्रारंभ केला | सोहं हा दीप ओवाळू गोविंदा | समाधी लागली पाहतां मुखारविंदा | हरीख हरीख हातो मुख पाहतां | चाकाटल्या ह्या नारी सर्वही अवस्था | सदभवालागी बहु हा देव भुकेला | रमावल्लभदासे नैवेद्य अर्पिला | फल तांबूल दक्षिणा अर्पीली | तयाउपरी नीरांजने मांडिली || आरती आरती करू गोपाळा |
Read More..श्री कालभैरव की आरती जय भैरव देवा, प्रभु जय भैंरव देवा। जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।। तुम्हीं पाप उद्धारक दुख सिंधु तारक। भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।। वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी। महिमा अमिट तुम्हारी जय जय भयकारी।। तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे। चौमुख दीपक दर्शन दुख सगरे खोंवे।। तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी। कृपा करिए भैरव करिए नहीं देरी।। पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।। बटुकनाथ बन बालक जन मन हर्षावत।। बटुकनाथ जी की आरती जो क
Read More..जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी | सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी || जय जय श्री शनिदेव.. श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी | नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी || जय जय श्री शनिदेव.. क्रीट मुकुट शीश रजित दीप्त है लिलारी | मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी || जय जय श्री शनिदेव.. मोदक मिष्ठान पान चरत है सुपारी | लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी || जय जय श्री शनिदेव.. देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी | विश्व नाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी || जय जय श्री शनिदेव..
Read More..श्री दत्ताची आरती त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा। त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्यराणा। नेती नेती शब्द न ये अनुमाना। सुरवर मुनिजन योगी समाधि न ये ध्याना॥ जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता। आरती ओवाळीतां हरली भवचिन्ता॥ सबाह्य अभ्यंतरी तू एक दत्त। अभाग्यासी कैसी न कळे ही मात। पराही परतली तेथे कैचा हेत। जन्ममरणाचा पुरलासे अन्त॥ जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता। आरती ओवाळीतां हरली भवचिन्ता॥ दत्त येऊनियां ऊभा ठाकला। सद्भावे साष्टांगे प्रणिपात केला। प्रसन्न होऊन
Read More..आरती श्री साईं गुरुवर की | परमानन्द सदा सुरवर की || जा की कृपा विपुल सुखकारी | दुःख, शोक, संकट, भयहारी || शिरडी में अवतार रचाया | चमत्कार से तत्व दिखाया || कितने भक्त चरण पर आये | वे सुख शान्ति चिरंतन पाये || भाव धरै जो मन में जैसा | पावत अनुभव वो ही वैसा || गुरु की उदी लगावे तन को | समाधान लाभत उस मन को || साईं नाम सदा जो गावे | सो फल जग में शाश्वत पावे || गुरुवासर करि पूजा - सेवा | उस पर कृपा करत गुरुदेवा || राम, कृष्ण, हनुमान रूप
Read More..शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जय कार।। शिव-शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी।। पार्वती तूं उमा कहलावे। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें।। रिद्धि सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।। सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी।। उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो।। घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।। श्रद्धा भाव से मंत्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकायें।। जय गिरराज किशोरी अम्बे।
Read More..जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥ ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥ ब्रह्म मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सरल संसारा॥ जय गायत्री वेद की माता। जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता॥ कमी कोई रहने ना पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने॥ जो तेरी महिमा को जाने। रद्रक्षा की माला ले कर॥ जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना॥ माँ तुम उसको सुख पहुचाना। ब्रह्मचारिणी तेरो नाम॥ पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का
Read More..ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे..... भक्तन के दुख टारे पल में दूर करे. जय जय श्री कृष्ण हरे..... परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी. जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी. जय जय श्री कृष्ण हरे..... कर कंचन कटि कंचन श्रुति कुंड़ल माला मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला, जय जय श्री कृष्ण हरे..... दीन सुदामा तारे, दरिद्र दुख टारे. जग के फ़ंद छुड़ाए, भव सागर तारे जय जय श्री कृष्ण हरे..... हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे. पाहन से प्रभु प्रगटे जन के बीच पड़े.
Read More..जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम॥ चन्द्र समाज तू शीतल दाती। चन्द्र तेज किरणों में समाती॥ क्रोध को शांत बनाने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली॥ मन की मालक मन भाती हो। चंद्रघंटा तुम वर दाती हो॥ सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली॥ हर बुधवार को तुझे ध्याये। श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥ मूर्ति चन्द्र आकार बनाए। शीश झुका कहे मन की बाता॥ पूर्ण आस करो जगत दाता। कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥ कर्नाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटू
Read More..कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥ पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी माँ भोली भाली॥ लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे॥ भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥ सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥ तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥ माँ के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥ तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो माँ संकट मेरा॥ मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥ तेरा द
Read More..जय तेरी हो स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥ सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥ तेरी जोत जलाता रहू मैं। हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥ कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥ कही पहाडो पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥ हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥ भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥ इंद्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥ दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खंडा हाथ उठाए॥ द
Read More..जय जय अंबे जय कात्यायनी। जय जगमाता जग की महारानी॥ बैजनाथ स्थान तुम्हारी। वहां वरदानी नाम पुकारा॥ कई नाम है कई धाम हैं। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥ हर मंदिर में जोत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥ हर जगह उत्सव होते रहते। हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥ कात्यायनी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥ झूठे मोह से छुड़ानेवाली। अपना नाम जपनेवाली॥ बृहस्पतिवार को पूजा करियो। ध्यान कात्यायनी का धरियो॥ हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
Read More..कालरात्रि जय-जय-महाकाली। काल के मुह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतार॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खडग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥ सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें। महाकाली माँ जिसे बचाबे॥
Read More..जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया॥ हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरी वहां निवासा॥ चंद्रकली ओर ममता अंबे। जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥ भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्यता॥ हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥ सती {सत} हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥ बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥ तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥ शनिवार को
Read More..जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता। तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥ तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥ कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥ तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है॥ रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥ तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥ तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया
Read More..जय जय सत्चित्स्वरूपा स्वामी गणराया ।
अवतरलासी भूवर जड-मुढ ताराया ।
।। जयदेव जयदेव ।।धृ।।
भगवद् गीता आरती
जय भगवद् गीते,
जय भगवद् गीते ।
हरि-हिय-कमल-विहारिणि,
सुन्दर सुपुनीते ॥कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,
कामासक्तिहरा ।
तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,
विद्या ब्रह्म परा ॥
जय भगवद् गीते...॥
निश्चल-भक्ति-विधायिनि,
निर्मल मलहारी ।
शरण-सहस्य-प्रदायिनि,
सब विधि सुखकारी ॥
जय भगवद् गीते...॥
राग-द्वेष-विदारिणि,
Read More..आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
गावत ब्रहमादिक मुनि नारद ।
बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥
शुक सनकादिक शेष अरु शारद ।
बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥ ॥
आरती श्री रामायण जी की..॥
गावत बेद पुरान अष्टदस ।
छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥
मुनि जन धन संतान को सरबस ।
सार अंश सम्मत सब ही की ॥ ॥
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