नारायण (श्री विष्णू )

आरती

नारायण (श्री विष्णू )

आरती

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भगवान सत्यनारायण की आरती

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥ जय लक्ष्मी.. रत्न जडि़त सिंहासन अद्भुत छवि राजै। नारद करत निरंजन, घण्टा ध्वनि बाजै ॥ जय लक्ष्मी.. प्रगट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो। बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कञ्चन महल कियो ॥ जय लक्ष्मी.. दुर्बल भील कराल, जिन पर कृपा करी। चन्द्रचूड़ एक राजा तिनकी विपत्ति हरी ॥ जय लक्ष्मी.. वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीनी। सो फल भोग्यो प्रभु जी, फिर-स्तुति कीन्हीं ॥ जय लक्ष्मी.. भा

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श्री विष्णूची आरती(मराठी)

आवडी गंगाजळे देवा न्हाणीले | भक्तीचे भूषण प्रेमासुगंध अर्पिले | अहं हा धूप जाळू श्रीहरीपुढे | जंव जंव धूप जळे | तंव तंव देवा आवडे | रमावल्लमदासे अहं धूप जाळिला | एकारतीचा मग प्रारंभ केला | सोहं हा दीप ओवाळू गोविंदा | समाधी लागली पाहतां मुखारविंदा | हरीख हरीख हातो मुख पाहतां | चाकाटल्या ह्या नारी सर्वही अवस्था | सदभवालागी बहु हा देव भुकेला | रमावल्लभदासे नैवेद्य अर्पिला | फल तांबूल दक्षिणा अर्पीली | तयाउपरी नीरांजने मांडिली || आरती आरती करू गोपाळा |

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