ऊँ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।। ऊँ जय अम्बे गौरी. माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृग मद को। उज्ज्वल से दोउ नैना चन्द्रवदन नीको।। ऊँ जय अम्बे गौरी. कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै।। ऊँ जय अम्बे गौरी. केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दु:खहारी।। ऊँ जय अम्बे गौरी. कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।। ऊँ जय अम्बे गौरी.
Read More..दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी | अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी | वारी वारी जन्ममरणाते वारी | हरी पडलो आता संकट निवारी || १ || जय देवी जय देवी महिषसूरमथिनी | सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी जय देवी जय देवी || धृ || त्रिभुवन भुवनी पाहता तुजऐसी नाही | चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही | साही विवाद करिता पडिले प्रवाही | तें तू भक्तालागी पावसी लवलाही || जय || २ || प्रसन्नवदने प्रसन्न होसी निजदासा | क्लेशापासुनि सोडावि तोडी भवपाषा अंबे तुजवाचून कोण पुरविल आशा |
Read More..शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जय कार।। शिव-शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी।। पार्वती तूं उमा कहलावे। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें।। रिद्धि सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।। सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी।। उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो।। घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।। श्रद्धा भाव से मंत्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकायें।। जय गिरराज किशोरी अम्बे।
Read More..जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥ ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥ ब्रह्म मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सरल संसारा॥ जय गायत्री वेद की माता। जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता॥ कमी कोई रहने ना पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने॥ जो तेरी महिमा को जाने। रद्रक्षा की माला ले कर॥ जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना॥ माँ तुम उसको सुख पहुचाना। ब्रह्मचारिणी तेरो नाम॥ पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का
Read More..जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम॥ चन्द्र समाज तू शीतल दाती। चन्द्र तेज किरणों में समाती॥ क्रोध को शांत बनाने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली॥ मन की मालक मन भाती हो। चंद्रघंटा तुम वर दाती हो॥ सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली॥ हर बुधवार को तुझे ध्याये। श्रद्दा सहित तो विनय सुनाए॥ मूर्ति चन्द्र आकार बनाए। शीश झुका कहे मन की बाता॥ पूर्ण आस करो जगत दाता। कांचीपुर स्थान तुम्हारा॥ कर्नाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटू
Read More..कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥ पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी माँ भोली भाली॥ लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे॥ भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥ सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥ तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥ माँ के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥ तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो माँ संकट मेरा॥ मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥ तेरा द
Read More..जय तेरी हो स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥ सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥ तेरी जोत जलाता रहू मैं। हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥ कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥ कही पहाडो पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥ हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥ भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥ इंद्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥ दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खंडा हाथ उठाए॥ द
Read More..जय जय अंबे जय कात्यायनी। जय जगमाता जग की महारानी॥ बैजनाथ स्थान तुम्हारी। वहां वरदानी नाम पुकारा॥ कई नाम है कई धाम हैं। यह स्थान भी तो सुखधाम है॥ हर मंदिर में जोत तुम्हारी। कही योगेश्वरी महिमा न्यारी॥ हर जगह उत्सव होते रहते। हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥ कात्यायनी रक्षक काया की। ग्रंथि काटे मोह माया की॥ झूठे मोह से छुड़ानेवाली। अपना नाम जपनेवाली॥ बृहस्पतिवार को पूजा करियो। ध्यान कात्यायनी का धरियो॥ हर संकट को दूर करेगी। भंडारे भरपूर करेगी॥
Read More..कालरात्रि जय-जय-महाकाली। काल के मुह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतार॥ पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥ खडग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥ कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥ सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥ रक्तदंता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥ ना कोई चिंता रहे बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥ उस पर कभी कष्ट ना आवें। महाकाली माँ जिसे बचाबे॥
Read More..जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया॥ हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरी वहां निवासा॥ चंद्रकली ओर ममता अंबे। जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥ भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्यता॥ हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥ सती {सत} हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥ बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥ तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥ शनिवार को
Read More..जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता। तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥ तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥ कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥ तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है॥ रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥ तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥ तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया
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