श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

आरती

श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

आरती

  • आरती संग्रह

भगवद्‍ गीता आरती

भगवद्‍ गीता आरती

 

जय भगवद् गीते,

जय भगवद् गीते ।

हरि-हिय-कमल-विहारिणि,

सुन्दर सुपुनीते ॥कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,

कामासक्तिहरा ।

तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,

विद्या ब्रह्म परा ॥

जय भगवद् गीते...॥

 

निश्चल-भक्ति-विधायिनि,

निर्मल मलहारी ।

शरण-सहस्य-प्रदायिनि,

सब विधि सुखकारी ॥

जय भगवद् गीते...॥

 

राग-द्वेष-विदारिणि, Read More..