ओमकार: मेंशिर: पातुमूलाधार निवासिनी। हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥ श्रींकारपातुवदने लावाण्या महेश्वरी । हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत। फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥